भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रणनीतिक कच्चे तेल के भंडारण की क्षमता बढ़ाने जा रहा है। सरकारी कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) देश में 1.75 मिलियन टन (करीब 12.8 मिलियन बैरल) क्षमता वाला नया रणनीतिक कच्चे तेल का भंडारण केंद्र विकसित करेगी।
रिपोर्टों के अनुसार, ONGC सरकार से इस भंडार के व्यावसायिक उपयोग की अनुमति भी मांगेगी, ताकि आवश्यकता पड़ने पर इसका बेहतर उपयोग किया जा सके।
फिलहाल भारत के पास 5.33 मिलियन टन (लगभग 39 मिलियन बैरल) क्षमता का रणनीतिक कच्चे तेल का भंडार है, जो दक्षिण भारत के तीन भूमिगत भंडारण केंद्रों में स्थित है। इनका संचालन इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) द्वारा किया जाता है। वर्तमान भंडार देश की लगभग आठ दिनों की कच्चे तेल की जरूरत पूरी कर सकता है।
पिछले महीने केंद्र सरकार ने ONGC को लगभग 1.6 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत से नया रणनीतिक भंडारण केंद्र विकसित करने का निर्देश दिया था। यह फैसला हाल के वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति संकट, बढ़ती ईंधन कीमतों और महंगाई को देखते हुए लिया गया है।
सरकार लंबे समय से देश की रणनीतिक तेल भंडारण क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है, क्योंकि भारत में ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी अतिरिक्त भंडारण क्षमता की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।
ONGC की इस परियोजना के अलावा सरकार दो और रणनीतिक तेल भंडारण केंद्र स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। इनमें से एक की क्षमता 4 मिलियन टन (करीब 29 मिलियन बैरल) और दूसरे की 2.5 मिलियन टन (लगभग 18.3 मिलियन बैरल) होगी।
भारत विदेशी कंपनियों के कच्चे तेल के भंडारण की संभावना पर भी विचार कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया संयुक्त अरब अमीरात यात्रा के दौरान अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) ने भारत में अपने कच्चे तेल का भंडार बढ़ाकर 30 मिलियन बैरल करने की इच्छा जताई। इसके बदले भारत भी यूएई के फुजैराह बंदरगाह पर अपने कुछ रणनीतिक तेल भंडार रखने की संभावना पर विचार कर रहा है।


