केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को कोयंबटूर स्थित वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया–सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री (WII-SACON) में मानव-वन्यजीव संघर्ष उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल का शुभारंभ भी किया गया तथा इस विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में देशभर के नीति-निर्माताओं, वन अधिकारियों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उपायों पर चर्चा की। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह भी मौजूद रहे।
भूपेंद्र यादव ने कहा कि आवास क्षेत्रों के सिकुड़ने, भूमि उपयोग में बदलाव और बढ़ती मानव गतिविधियों के कारण इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव बढ़ा है, जो आज देश के सामने एक बड़ी संरक्षण और विकास संबंधी चुनौती बन चुका है। उन्होंने आधुनिक तकनीक आधारित समाधान अपनाने पर जोर दिया।
उन्होंने बाघ अभयारण्यों से बाहर रहने वाले बाघों, तेंदुओं और हाथियों से जुड़े संघर्षों के लिए प्रभावी नीति तैयार करने की आवश्यकता बताई। साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बड़े स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाने की बात कही, ताकि लोग वन्यजीवों के साथ होने वाले आमने-सामने की स्थिति का सुरक्षित तरीके से सामना कर सकें।
मंत्री ने राज्य वन विभागों से फसलों, संपत्ति और मानव बस्तियों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों की भागीदारी, आधुनिक तकनीक और बेहतर संरक्षण उपायों के माध्यम से मानव-वन्यजीव संघर्ष को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “संघर्ष नहीं, बल्कि सह-अस्तित्व और सामंजस्य ही पारिस्थितिकीय स्थिरता का मूल मंत्र होना चाहिए।”
भूपेंद्र यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के अनुरूप स्थापित यह उत्कृष्टता केंद्र मानव-वन्यजीव संघर्ष पर अनुसंधान, नीति निर्माण, नवाचार, प्रशिक्षण और सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रसार का राष्ट्रीय केंद्र बनेगा।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण में सफलता के कारण मानव और वन्यजीवों के बीच संपर्क बढ़ा है, जिससे सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां भी सामने आई हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह केंद्र अधिकारियों और स्थानीय समुदायों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के बेहतर उपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस अवसर पर राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल भी लॉन्च किया गया, जो देशभर में डेटा प्रबंधन, जानकारी साझा करने और निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत करेगा। साथ ही ‘Current Status of Human-Wildlife Conflict in India: An Overview’ शीर्षक से पहली रिपोर्ट भी जारी की गई, जिसमें देश में मानव-वन्यजीव संघर्ष की वर्तमान स्थिति और चुनौतियों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।
कार्यशाला में मानव-हाथी संघर्ष, मानव-बड़े वन्यजीव संघर्ष तथा तकनीक आधारित समाधान जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया।
यह उत्कृष्टता केंद्र वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ मानव जीवन और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।


