बायोकैच की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बैंकिंग क्षेत्र धोखाधड़ी से जुड़ी बढ़ती चुनौतियों का सामना कर रहा है। सर्वे में शामिल 84% बैंकिंग अधिकारियों ने पिछले एक वर्ष में धोखाधड़ी से होने वाले नुकसान में वृद्धि की जानकारी दी।
यह सर्वे 25 देशों के 1,440 फ्रॉड मैनेजमेंट, एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML), जोखिम और अनुपालन विशेषज्ञों पर आधारित है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय धोखाधड़ी और एआई आधारित खतरों को लेकर भारत दुनिया के सबसे अधिक प्रभावित और चिंतित देशों में शामिल है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 84% उत्तरदाताओं का मानना है कि आने वाले एक वर्ष में एआई एजेंट्स बैंकिंग उद्योग की सबसे बड़ी कमजोरियों में से एक बन सकते हैं।
भारत में सर्वे किए गए 100 बैंकिंग और वित्तीय अपराध रोकथाम विशेषज्ञों में से 90% ने बताया कि उनके संस्थानों में धोखाधड़ी के प्रयास बढ़े हैं। यह आंकड़ा वैश्विक औसत 81% से काफी अधिक है और पिछले वर्ष के 70% के मुकाबले उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है।
सर्वे में यह भी सामने आया कि 84% भारतीय बैंकिंग नेताओं ने धोखाधड़ी से होने वाले नुकसान में वृद्धि दर्ज की, जबकि वैश्विक औसत 76% रहा। वर्ष 2025 में यह आंकड़ा केवल 57% था।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर चिंताएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। लगभग 93% भारतीय उत्तरदाताओं का मानना है कि एआई ने धोखाधड़ी और ठगी के तरीकों को अधिक जटिल बना दिया है। वहीं 90% का कहना है कि भविष्य में वैध एआई-सहायता प्राप्त गतिविधियों और दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों के बीच अंतर करना बेहद कठिन होगा।
धोखाधड़ी की बढ़ती गति भी एक बड़ी चिंता है। 95% भारतीय बैंकिंग नेताओं ने कहा कि वे धोखाधड़ी के तेजी से बढ़ते मामलों को लेकर बेहद चिंतित हैं, जबकि वैश्विक औसत 76% है।
रिपोर्ट के अनुसार, 48% संस्थानों को हर साल 1 करोड़ डॉलर (USD 10 million) से अधिक का नुकसान होता है। इनमें से 32% को 2.5 करोड़ डॉलर से अधिक, 16% को 5 करोड़ डॉलर से अधिक और 6% को 10 करोड़ डॉलर से अधिक का वार्षिक नुकसान झेलना पड़ता है।
ग्राहक भी भारी नुकसान उठा रहे हैं। 58% उत्तरदाताओं ने अनुमान लगाया कि उनके ग्राहक हर साल 50 लाख डॉलर से अधिक की ठगी का शिकार होते हैं, जबकि 44% ने यह आंकड़ा 1 करोड़ डॉलर से अधिक बताया।
तत्काल भुगतान प्रणालियां भी धोखाधड़ी का प्रमुख माध्यम बन रही हैं। लगभग 66% भारतीय बैंकिंग नेताओं ने इंस्टेंट पेमेंट प्लेटफॉर्म्स के जरिए होने वाले स्कैम को बढ़ती धोखाधड़ी का मुख्य कारण बताया। रिपोर्ट के अनुसार, यूपीआई (UPI) के तेज़ी से बढ़ते उपयोग ने साइबर अपराधियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।
बायोकैच के सीईओ गादी माज़ोर ने कहा कि एआई ग्राहकों और वित्तीय संस्थानों के बीच होने वाले डिजिटल संवाद को बदल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अपराधी भी एआई का उपयोग कर अधिक उन्नत वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे डिजिटल लेनदेन अधिक तेज़, स्वचालित और एआई-संचालित होते जाएंगे, बैंकों को केवल पहचान सत्यापन पर निर्भर रहने के बजाय ग्राहकों के व्यवहार, इरादों और भरोसे के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था विकसित करनी होगी।


