एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत का चालू खाता घाटा (CAD) जीडीपी के 1.5% से 1.7% के बीच रहने की संभावना है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाल ही में उठाए गए कदम देश की बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूत कर सकते हैं और भुगतान संतुलन (BoP) को अधिशेष में पहुंचा सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि फरवरी और जून 2026 में RBI द्वारा घोषित उपायों का उद्देश्य रुपये को स्थिरता प्रदान करना, विदेशी पूंजी आकर्षित करना, घरेलू ऋण बाजार को मजबूत बनाना और विदेशी वित्तपोषण को आसान करना है।
एसबीआई रिसर्च का मानना है कि भले ही भारत FY27 में चालू खाता घाटे में बना रहेगा, लेकिन RBI की नई पहलों से आने वाली विदेशी मुद्रा आमद इस घाटे को आसानी से वित्तपोषित कर सकेगी।
रिपोर्ट के अनुसार, FY27 में भारत का कुल भुगतान संतुलन 5 से 10 अरब अमेरिकी डॉलर के अधिशेष में रह सकता है। यह पहले के 65-70 अरब डॉलर के संभावित घाटे के अनुमान की तुलना में बड़ा सुधार होगा।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि FY27 के दौरान विभिन्न माध्यमों से 55-65 अरब डॉलर की विदेशी पूंजी भारत में आ सकती है।
इनमें से लगभग 40-45 अरब डॉलर की राशि एफसीएनआर (बी) [FCNR(B)] जमा के माध्यम से आने की उम्मीद है। बैंक इस योजना के तहत 5.5% से 6% तक की आकर्षक ब्याज दरें प्रदान कर सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि RBI द्वारा नई FCNR(B) जमाओं को नकद आरक्षित अनुपात (CRR) और वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) की शर्तों से छूट देने तथा हेजिंग लागत वहन करने के फैसले ने इस योजना को और आकर्षक बना दिया है।
इसके अलावा, ECB/OFCB स्वैप विंडो के जरिए 15-20 अरब डॉलर की अतिरिक्त विदेशी मुद्रा आने की संभावना है, जिससे विदेशी मुद्रा उधारी को बढ़ावा मिलेगा और डॉलर की उपलब्धता बेहतर होगी।
एसबीआई रिसर्च के अनुसार, इन पूंजी प्रवाहों से भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होगी और RBI को मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव से बेहतर तरीके से निपटने में मदद मिलेगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इससे बैंकिंग प्रणाली में तरलता सुधरेगी। FY27 में बैंकिंग क्षेत्र की जमा वृद्धि दर 14.5-15% तक पहुंच सकती है, जबकि ऋण वृद्धि लगभग 16% रहने का अनुमान है, जिससे क्रेडिट-डिपॉजिट अंतर कम होगा।
हाल ही में RBI ने घोषणा की थी कि अमेरिकी डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा के तहत जुटाई गई नई FCNR(B) जमाओं को CRR और SLR आवश्यकताओं से छूट दी जाएगी। यह छूट 30 सितंबर 2026 तक जुटाई गई तीन से पांच वर्ष की अवधि वाली जमाओं पर लागू होगी।
RBI ने इस संबंध में वाणिज्यिक बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी की हैं।
एसबीआई रिसर्च का मानना है कि मजबूत विदेशी पूंजी प्रवाह, बढ़ते विदेशी मुद्रा भंडार और बेहतर भुगतान संतुलन की स्थिति FY27 में भारत की व्यापक आर्थिक स्थिरता को मजबूत आधार प्रदान करेगी।


