Saturday, May 23, 2026
Saturday, May 23, 2026
HomeGeneralभगवंत मान सरकार का सार्वभौमिक स्वास्थ्य मॉडल आयुष्मान भारत से बेहतर, बिना...

भगवंत मान सरकार का सार्वभौमिक स्वास्थ्य मॉडल आयुष्मान भारत से बेहतर, बिना शर्त हर परिवार को कवरेज

₹10 लाख तक का कवर सभी के लिए, चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं, जहां केंद्र की व्यवस्था सीमित है, पंजाब ने सार्वजनिक स्वास्थ्य को नए मानक दिए

न कोई सूची, न कोई बहिष्करण, मुख्यमंत्री सेहत योजना ने आयुष्मान भारत की खामियों को बेपर्दा किया

स्वास्थ्य सेवा हर नागरिक तक पहुंचनी चाहिए, न कि केवल चुनिंदा लोगों तक, पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना में उपचार का अधिकार पात्रता नहीं, आवश्यकता तय करती है: डॉ. बलबीर सिंह

जब बढ़ती चिकित्सा लागत देशभर के परिवारों को आर्थिक दबाव में धकेल रही है, ऐसे समय में स्वास्थ्य सेवाओं के वित्तपोषण और वितरण के मॉडल में स्पष्ट अंतर सामने आ रहा है। जहां केंद्र की आयुष्मान भारत योजना 140 करोड़ की आबादी के लिए ₹9,500 करोड़ का प्रावधान करती है, वहीं पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना केवल 3 करोड़ निवासियों के लिए ₹2,000 करोड़ आवंटित करती है, यानी प्रति व्यक्ति लगभग दस गुना अधिक निवेश।

यह अंतर केवल बजट का नहीं, सोच का है। जहां राष्ट्रीय योजना पात्रता और कवरेज दोनों को ₹5 लाख तक सीमित करती है, वहीं पंजाब का मॉडल बिना किसी शर्त हर निवासी को ₹10 लाख तक का कैशलेस उपचार सुनिश्चित करता है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने स्वास्थ्य सेवा को लक्षित लाभ नहीं, बल्कि एक सुनिश्चित अधिकार के रूप में स्थापित किया है, जहां इलाज का आधार सूची में नाम नहीं, बल्कि वास्तविक आवश्यकता है।

अधिकांश भारतीय परिवारों के लिए किसी भी चिकित्सा आपात स्थिति के साथ दो प्रश्न तुरंत खड़े होते हैं, इलाज कितनी जल्दी शुरू होगा और खर्च कैसे उठाया जाएगा। इन दोनों चिंताओं का समाधान करते हुए पंजाब सरकार ने 2026-27 के बजट में मुख्यमंत्री सेहत योजना के लिए ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया है, जिसके तहत 65 लाख परिवारों के लगभग 3 करोड़ निवासियों को प्रति परिवार ₹10 लाख तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवर दिया जा रहा है।

आयुष्मान भारत जैसी लक्षित योजनाओं के विपरीत, पंजाब का यह मॉडल सार्वभौमिक कवरेज पर आधारित है, जिसमें किसी भी प्रकार की पात्रता बाधा नहीं है।

दोनों दृष्टिकोणों का अंतर बुनियादी है। मुख्यमंत्री सेहत योजना यह नहीं पूछती कि कौन पात्र है। पंजाब का हर निवासी इसमें शामिल है, आय की परवाह किए बिना। इसके विपरीत, 2026 में शुरू हुई आयुष्मान भारत योजना केवल उन परिवारों तक सीमित है जिन्हें एसईसीसी डाटाबेस में आर्थिक रूप से कमजोर के रूप में चिन्हित किया गया है। जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा, विशेषकर वे निम्न एवं मध्यम आय वर्ग के परिवार जो इस डेटाबेस में शामिल नहीं हैं, अब भी इसके दायरे से बाहर है।

कवरेज का दायरा भी इस अंतर को और स्पष्ट करता है। आयुष्मान भारत शुरू से ही प्रति परिवार ₹5 लाख तक सीमित है और बढ़ती चिकित्सा लागत के बावजूद इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसके मुकाबले मुख्यमंत्री सेहत योजना इस सीमा को दोगुना कर ₹10 लाख तक ले जाती है और उन परिवारों को भी सुरक्षा देती है जो पहले सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के दायरे से बाहर थे।

वित्तीय प्रतिबद्धता भी इसी प्राथमिकता को दर्शाती है। जहां केंद्र 140 करोड़ लोगों के लिए ₹9,500 करोड़ खर्च कर रहा है, वहीं पंजाब 3 करोड़ निवासियों के लिए ₹2.000 करोड़ निवेश कर रहा है, जो प्रति व्यक्ति कहीं अधिक है और व्यापक, सुलभ स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता देने का स्पष्ट संकेत है।

मुख्यमंत्री सेहत योजना उपचार के दायरे का भी विस्तार करती है। लाभार्थी 2,300 उपचार पैकेजों के तहत हृदय रोग, कैंसर, गुर्दा रोग, अस्थि संबंधी उपचार और दुर्घटना से जुड़ी गंभीर स्थितियों सहित अनेक बीमारियों का कैशलेस इलाज प्राप्त कर सकते हैं। इसके मुकाबले आयुष्मान भारत लगभग 1,900 पैकेजों तक सीमित है। स्पष्ट है कि यहां इलाज का निर्णय चिकित्सा आवश्यकता से होता है, न कि आर्थिक क्षमता से।

योजना तक पहुंच की प्रक्रिया भी एक बड़ा बदलाव दर्शाती है। आयुष्मान भारत में पहले यह जांचना पड़ता है कि परिवार का नाम एसईसीसी सूची में है या नहीं, औ सूची से बाहर परिवारों को पात्रता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज संबंधी कार्यवाही से गुजरना पड़ता है। इसके विपरीत, मुख्यमंत्री सेहत योजना इस प्रक्रिया को सरल बनाती है। निवासी सेवा केंद्रों या कॉमन सर्विस सेंटरों पर जाकर, या आधार या वोटर आईडी के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, बिना आय या पेशे के प्रमाण के। व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित युवा क्लब सदस्य घर-घर जाकर लोगों को पंजीकरण में सहायता दे रहे हैं और सेहत कार्ड उनके घर तक पहुंचा रहे हैं।

इसका प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। मोगा में 98 वर्षीय महिला मुख्तियार कौर को इस योजना के तहत कीमोथेरेपी सहित विशेष उपचार पूरी तरह कैशलेस मिला। इस उम्र में जहां निरंतर चिकित्सा देखभाल अत्यंत आवश्यक होती है, वहां सेहत कार्ड ने यह सुनिश्चित किया कि इलाज बिना किसी देरी और आर्थिक दबाव के शुरू हो सके।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में मुख्यमंत्री सेहत योजना इस सिद्धांत पर आधारित है कि स्वास्थ्य सेवा हर नागरिक तक पहुंचनी चाहिए, न कि केवल चुनिंदा लोगों तक। प्रति व्यक्ति अधिक निवेश के माध्यम से पंजाब यह सुनिश्चित कर रहा है कि इलाज तक पहुंच पात्रता या आय नहीं, बल्कि आवश्यकता से तय हो।”

अब तक 9 लाख से अधिक सेहत कार्ड जारी किए जा चुके हैं और लाभार्थी 900 से अधिक सूचीबद्ध अस्पतालों के नेटवर्क में उपचार प्राप्त कर रहे हैं, जिससे राज्य भर में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच लगातार बढ़ रही है।

ऐसे देश में जहां एक अस्पताल का बिल ही परिवारों को कर्ज में डाल सकता है, यह अंतर अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि वैचारिक है। एक मॉडल पात्रता के आधार पर सेवा को सीमित करता है, जबकि दूसरा इसे हर नागरिक का अधिकार बनाता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments